परिणाम परिवार और समाज का यह नहीं कहता कि मर्यादित चाह गलत है - हम कभी अपने बच्चों को गलत करने की सलाह नहीं देते, सत्य के दुखद आघातों से त्रस्त हम उन्हें झूठ बोलना नहीं सिखाते . कुछ परम्पराओं की अपनी ख़ूबसूरती होती है,अपना मूल्य होता है .
दहेज़ हत्या, जबरदस्ती,तलाक से हम बाज़ार से सिंदूर और चूड़ियों को नहीं मिटा देते . मन हमेशा सत्य शिव और सुन्दर ही चाहता है
सतीश सक्सेना
कर्कश भाषा ह्रदय को चुभने वाली, कई वार बेहद गहरे घाव देने वाली होती है ! और अगर यही तीर जैसे शब्द अगर नारी के मुख से निकलें तो उसके स्वभावगत गुणों, स्नेहशीलता, ममता, कोमलता का स्वाभाविक अपमान होगा ! और यह बात ख़ास तौर पर, भारतीय परिवेश में, घर के बड़ों के सामने चाहे मायका हो.या ससुराल, जरूर याद रखना चाहिए ! अपने से बड़ों को दुःख देकर सुख की इच्छा करना व्यर्थ है !
नारी की पहचान कराये
भाषा उसके मुखमंडल की
अशुभ सदा ही कहलाई है
सुन्दरता कर्कश नारी की !
ऋषि मुनियों की भाषा लेकर तपस्विनी सी तुम निखरोगी
पहल करोगी अगर नंदिनी, घर की रानी तुम्ही रहोगी !
कटुता , मृदुता नामक बेटी
दो देवी हैं, इस जिव्हा पर
कटुता जिस जिव्हा पर रहती
घर विनाश की हो तैयारी !
कष्टों को आमंत्रित करती, गृह पिशाचिनी सदा हँसेगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी, घर की रानी तुम्ही रहोगी !
उस घर घोर अमंगल रहता
दुष्ट शक्तियां ! घेरे रहतीं !
जिस घर बोले जायें कटु वचन
कष्ट व्याधियां कम न होतीं ,
मधुरभाषिणी बनो लाडिली, चहुँ दिशी विजय तुम्हारी होगी
पहल करोगी अगर नंदिनी, घर की रानी तुम्ही रहोगी !
घर में मंगल गान गूंजता,
यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
दो मीठे बोलों से बेटी !,
घर भर में दीवाली होती
उस घर खुशियाँ रास रचाएं ! कष्ट निवारक तुम्ही लगोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !
अधिक बोलने वाली नारी
कहीं नही सम्मानित होती
अन्यों को अपमानित करके
वह गर्वीली खुश होती है,
सारी नारी जाति कलंकित, इनकी उपमा नहीं मिलेगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !






