रविवार, 24 नवंबर 2013

मेरी नज़र से ओल्ड इज़ गोल्ड - 1



मीना कुमारी 
जन्म: 01 अगस्त 1932
निधन: 31 मार्च 1972
उपनाम नाज़
जन्म स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत
कुछ प्रमुख
कृतियाँ  - तन्हा चाँद / मीना कुमारी (गुलज़ार द्वारा संकलित)
विविध - मीना कुमारी भारतीय हिन्दी सिनेमा की एक बहुत मशहूर अभिनेत्री थीं।


मीना कुमारी का असली नाम माहजबीं बानो था और ये बंबई में पैदा हुई थीं . माहजबीं ने पहली बार किसी फिल्म के लिये छह साल की उम्र में काम किया था। उनका नाम मीना कुमारी विजय भट्ट की खासी लोकप्रिय फिल्म बैजू बावरा पड़ा। मीना कुमारी की प्रारंभिक फिल्में ज्यादातर पौराणिक कथाओं पर आधारित थे। मीना कुमारी के आने के साथ भारतीय सिनेमा में नयी अभिनेत्रियों का एक खास दौर शुरु हुआ था जिसमें नरगिस, निम्मी, सुचित्रा सेन और नूतन शामिल थीं।
फिल्म बैजू बावरा उनके जीवन की पहली बड़ी हिट फिल्म मानी जाती है और इसके बाद तो उन्होंने एक से एक हिट फिल्में दी। चार बार उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 1963 में फिल्मफेयर अवा‌र्ड्स में 'बेस्ट एक्ट्रेस इन लीडिंग रोल' कैटेगिरी के लिए नॉमिनेट होने वाली अकेली हीरोइन थीं। उन्हें तीन अलग-अलग फिल्मों के लिए नॉमिनेट किया गया था। फिल्मफेयर अवा‌र्ड्स में यह उपलब्धि आज तक कोई हीरोइन हासिल नहीं कर पाई है। वैसे कम लोग जानते हैं कि कॉमेडी किंग कहे जाने वाले महमूद मीना कुमारी के जीजा थे। वह मीना को टेनिस खेलना सिखाते थे बाद में उन्होंने मीना की बड़ी बहन मधु से शादी की थी। हालांकि आगे चलकर उनका तलाक हो गया।
मीना कुमारी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कवियित्री भी थीं लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी कवितायें छपवाने की कोशिश नहीं की। उनकी लिखी कुछ उर्दू की कवितायें नाज़ के नाम से बाद में छपी।
जब उनका तलाक हुआ तो उन्होंने कमाल अमरोही के लिए एक शेर लिखा था-
'तलाक तो दे रहे हो नजर-ए-कहर के साथ, मेरी जवानी भी लौटा दो मेहर के साथ।'

आसमान की बुलंदियों को छूने वाली इस अदाकारा ने भी नहीं सोचा होगा किअपने दिनों में वे एक-एक पैसे के लिए तरस जाएंगी। मुंबई के जिस नर्सिग होम में उन्होंने दम तोड़ा, उसके बिल चुकाने के लिए भी पैसे नहीं थे। यह बिल एक डॉक्टर ने चुकाया था, जो मीना का बहुत बड़ा फैन था।
सिर्फ 39 साल में लिवर सिरोसिस के चलते दुनिया को अलविदा करने वाली मीना कुमारी जाते-जाते भी 'पाकीजा' जैसी बेहतरीन फिल्म के रूप में अपने चाहने वालों को ऐसा तोहफा दे गई, जिसके लिए लोग उन्हें आज भी याद करते हैं।

यह तो उनका परिचय है, मैं साहब,बीवी और गुलाम की छोटी बहू से आपको मिलवाती हूँ  .... फ़िल्म के दृश्य में जब पहली बार भूतनाथ (गुरुदत्त) छोटी बहू के कमरे में जाता है और कैमरा सजे पाँव से जब ऊपर की तरफ जाता है तो छोटी बहू यानि मीना कुमारी का वह चेहरा अद्भुत करिश्मा ही लगता है 
आज भी कानों में वह नशीली आवाज़ गूंजती है,
"मैं अगर मर जाऊँ तो मुझे खूब  सजाना 
....... दुनियावाले कह सकें - सती लक्ष्मी चल बसी"

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उनकी नज़में मन में कहती हैं - कोई दूर से आवाज़ दे,चले आओ  .... 

रात सुनसान है 
तारीक है दिल का आंगन 
आसमां पर कोइ तारा न जमीं पर जुगनू 
टिमटिमाते हैं मेरी तरसी हुइ आँखों में 
कुछ दिये 
तुम जिन्हे देखोगे तो कहोगे : आंसू 

दफ़अतन जाग उठी दिल में वही प्यास, जिसे 
प्यार की प्यास कहूं मैं तो जल उठती है ज़बां 
सर्द एहसास की भट्टी में सुलगता है बदन 
प्यास - यह प्यास इसी तरह मिटेगी शायद 
आए ऐसे में कोई ज़हर ही दे दे मुझको

कम उम्र से जो नज़्म मेरी ज़ुबान पर चढ़ी - 

पूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती है
रात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है
साँस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है, न अब आस्तीं तर होती है
जैसे जागी हुई आँखों में, चुभें काँच के ख़्वाब
रात इस तरह, दीवानों की बसर होती है
ग़म ही दुश्मन है मेरा, ग़म ही को दिल ढूँढता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है
एक मर्कज़ की तलाश, एक भटकती ख़ुशबू
कभी मंज़िल, कभी तम्हीदे-सफ़र होती है 

दिल से अनमोल नगीने को छुपायें तो कहाँ
बारिशे-संग यहाँ आठ पहर होती है 

काम आते हैं न आ सकते हैं बे-जाँ अल्फ़ाज़
तर्जमा दर्द की ख़ामोश नज़र होती है.

सच है =

सुबह से शाम तलक 
दुसरों के लिए कुछ करना है 
जिसमें ख़ुद अपना कुछ नक़्श नहीं 
रंग उस पैकरे-तस्वीर ही में भरना है 
ज़िन्दगी क्या है, कभी सोचने लगता है यह ज़हन 
और फिर रूह पे छा जाते हैं 
दर्द के साये, उदासी सा धुंआ, दुख की घटा 
दिल में रह रहके ख़्याल आता है 
ज़िन्दगी यह है तो फिर मौत किसे कहते हैं? 
प्यार इक ख़्वाब था, इस ख़्वाब की ता'बीर न पूछ 
क्या मिली जुर्म-ए-वफ़ा की ता'बीर न पूछ






7 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर बातें मीना कुमारी जी के बारे में..
    सुन्दर नज्मे..
    :-)

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  2. इस अद्भुत अदाकारा नज्मो में दर्द का एहसास है ...........

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  3. मीना कुमारी मेरी बहुत ही फेवरिट कलाकारों में से एक हैं ! उनको देखना और पढना बहुत अच्छा लगता है ! आपने अपनी पोस्ट के द्वारा यह विशेष अनुभव जीने का अवसर दिया ! धन्यवाद आपका !

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  4. गम अगरबत्ती की तरह
    देर तक जला करते हैं -----

    दुखांत भूमिकाओं कि रानी
    मीना कुमारी

    सुंदर और प्रभावशाली
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है--
    आशाओं की डिभरी ----------

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  5. मीना कुमारी की याद दिला गयी यह पोस्ट . . .

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