गुरुवार, 8 मई 2014

अच्छा लेखन






लेखन हो या वक्तव्य
वो झोपडी से उठते उस धुएँ में होता है
जिसे पाँच दिन के भूखे पेट से
बच्चे टकटकी लगाए देखते हैं
गले के नीचे थूक गुटकने के साथ
जिसमें एक अनोखा स्वाद उतरता है
शब्द उस घुटने से बहते हैं
जिसकी जलन एक चॉकलेट में बच्चे भूल जाते हैं
शब्द वहाँ तैरते हैं
जहाँ सीख में रामायण,महाभारत उदाहरण में होता है
लिखना इतना आसान नहीं होता
जब होता है कभी आसान
तो लेखक को लिख पाना पाठक के लिये नहीं होता आसान  …

वीरू सोनकर https://www.facebook.com/veeru.sonker मेरी नज़र से


सुनो
जब कभी तुम
किसी से ये सुनना कि
सबसे अच्छा लेखन
लेखक
अपने सबसे बुरे वक़्त में करता हैं
तब
तुम ये याद रखना कि
सबसे अच्छा लेखन
कभी भी
हमारे सामने नहीं आ पाता,
हमारे
अस्पतालों में
वृद्ध आश्रमो में
बड़ी बड़ी हवेलियों के पिछवाड़े
के बदबू दार कमरों में
जहाँ कोई जाना नहीं चाहता
बस दिन भर में
दो बार
खाने की प्लेट सरकाई जाती हैं
वो
बीमार और लाचार
घरो से त्यागे हुए
एक उम्र जिए हुए
चरम और निम्नतम को
देखे हुए
महसूस किये हुए
नितांत अकेलेपन में
अपना
सबसे अच्छा और दर्द भरा
काव्य सोचते हैं......../
वो काव्य
कभी लिखे नहीं जाते
क्युकी
कभी
उन सोचो को
कलम नहीं मिलती
कभी लिखने वाले हाथ काम नहीं करते
वो काव्य कभी सुने नहीं गए
वो दर्द कभी सराहे नहीं गए
न ही उनकी लेखन शैली पर
कभी गोष्ठियां हुई
वो तो बस
अभिशप्त थे
मन ही मन बुदबुदाने को
वो कविताये हमेशा
अनसुनी ही रही.....
दुनिया का
कोई भी लेखक
उनसे अधिक एकाग्र नहीं हो सकता
कभी नहीं हो सकता
जान लो
दुनिया का सर्वश्रेठ काव्य
हमेशा मौन रहता हैं
वो कभी सुना नहीं जाता
वो अभिशप्त हैं
अकेले सिसकते हुए मरने को...........

5 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया का सर्वश्रेठ काव्य
    हमेशा मौन रहता हैं
    वो कभी सुना नहीं जाता
    वो अभिशप्त हैं
    अकेले सिसकते हुए मरने को....शायद यही कड़वा सच है....

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  2. दुनिया का सर्वश्रेठ काव्य
    हमेशा मौन रहता हैं .... बहुत सही

    जब तक लेखक खुद एक मनः स्थिति से ना गुजरा हो
    तब तक लेखन अधूरा सा लगता है
    सादर!

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  3. दुनिया का सर्वश्रेठ काव्य
    हमेशा मौन रहता हैं
    वो कभी सुना नहीं जाता
    वो अभिशप्त हैं
    अकेले सिसकते हुए मरने को..........बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

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  4. आप सभी के स्नेह का बहुत बहुत आभार........

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