शुक्रवार, 15 जून 2012

लाइफ क्या है ?




छोटे छोटे पल
जिनमे हम ख़ुशी ढूंढते हैं
कभी ठोकर तो
कभी सवाल भी पाते हैं


कभी माँ की डांट पड़ती
तो कभी फ़ुल्ल ऑन मस्ती …


कभी वी हैव हंड्रेड्स ऑफ़ ऐन्सर्स
तो कभी सिर्फ प्रोब्लेम्स …


कभी लगता वी हैव दी पॉवर टू फेस दी वर्ल्ड
तो कभी बस एक हल्की सी हिचकिचाहट


इतना सोचना क्यूँ , जस्ट लेट गो …
क्यूंकि लाइफ यही तो है …


अपराजिता कल्याणी

10 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. Os ke boond si nirmal abhivyakti.. bilkul man ke khayaal.. spasht utre hue shabdon mein..

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  2. बहुत सुन्दर...................
    समथिंग डिफेरेंट.........
    :-)

    अनु

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  3. कभी माँ की डांट पड़ती
    तो कभी फ़ुल्ल ऑन मस्ती …
    जब माँ कवच हो जाती तो जमाने की खुशियां कदमों में सिमटी लगती हैं जिन्‍दगी में ... लाजवाब प्रस्‍तुति ...

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  4. अरे वाह .... आज बिटिया है .... मन-मयूर झूम उठा .... :D
    इतना सोचना क्यूँ , जस्ट लेट गो …
    क्यूंकि लाइफ यही तो है …
    हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ लाइफ यही तो है … !!

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  5. कल 20/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    बहुत मुश्किल सा दौर है ये

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  6. कुछ खयाल कुछ मलाल के साथ सोच की दहलीज़ पर झाँकती, झटके से बालों को पीछे फेकती, कुछ खोयी कुछ जागी सी मेट्रो ट्रेन पर सवार एक रचना ।

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  7. एक अलग नज़र से लाइफ को देखना अच्छा है. सुंदर प्रस्तुति के लिये बधाई अपराजिता.

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