सोमवार, 16 नवंबर 2015

मील के पत्थर (८)




मन की कई परतें होती हैं 
चेहरे की शुष्कता में 
नमी हाहाकार करती है 
खुदाई करो, अवशेषों से पहचान होगी 
कुछ कथा ये लिखेंगे 
कुछ कथा वे लिखेंगे 
कुछ अनकहे,अनपढ़े रह जायेंगे  .... 

मेरी यात्रा की कोशिश है, हर पड़ाव पर एक विशेष मुलाकात हो  - आज मैं लाई हूँ विमला तिवारी 'विभोर' जी की कल्पनाओं को http://vimlatiwari.blogspot.in/


पीड़ा तेरे रूप अनेक


कौन बताये क्या है भेद
पीड़ा तेरे रूप अनेक 
पहले पता खोजती फिरती
फिर है मिलती निमित्त विशेष
हाथ पकड़ करती आलिंगन
बनती स्वयं का ही प्रतिवेष
पीड़ा तेरे रूप अनेक

पहले तो करती हो स्वागत
बढ़ कर फिर करती हो अभिषेक
पीड़ा तेरे रूप अनेक

पहली लगती हो रोमांचक
फिर हो जाती हो अभिप्रेत
पहले अनदेखी अनजानी
चहुँदिशि अब तुम ही सर्वेश
पीड़ा तेरे रूप अनेक

वाष्प मेघ जल, वाष्प मेघ जल
अद्भुत विश्व रचयिता एक
यह कैसा अनिकेत निकेतन
दृष्टि एक और दृश्य अनेक
पीड़ा तेरे रूप अनेक

सिन्धु सिमिट कर बिन्दु
पलक में सुन्दर है मुक्तेश
प्रति पद घात बिलखती फिरती
अब सुन्दर मूरत सुविशेष
जाग्रत स्वप्न देखती पलकें
परिचित परिचय में क्या भेद
पीड़ा तेरे रूप अनेक



मधुर नाम है राम तुम्हारा


मधुर नाम है राम तुम्हारा।
परम मंत्र है नाम तुम्हारा॥

राम नाम है, राम राह है, राम लक्ष्य है, राम मंत्र है।
सुन्दर नाम है राम तुम्हारा, सुन्दरतम है रूप तुम्हारा।
मधुर नाम है राम तुम्हारा।

राम भाव है, राम स्तोत्र है, राम आदि है, राम अन्त है।
दिव्य नाम है राम तुम्हारा, दिव्य रूप है राम तुम्हारा।
मधुर नाम है राम तुम्हारा।

राम शक्ति है, राम विजय है, राम प्रेम है, राम इष्ट है।
शुभारम्भ है नाम तुम्हारा, इष्टमंत्र है राम तुम्हारा।
मधुर नाम है राम तुम्हारा।

दिव्य गान है नाम तुम्हारा, जन्म दिवस है नाम तुम्हारा।
आज धन्य लिख लिख नाम तुम्हारा।
आज मुग्ध लख रूप तुम्हारा।
मधुर नाम है राम तुम्हारा।
परम मंत्र है नाम तुम्हारा।।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 17 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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