बुधवार, 12 सितंबर 2012

पंचम सुर में भजन



सुनीता सनाढ्य पाण्डेय


आज सुबह जब वो बोले ए जी
तुम भजन बहुत सुनाती हो
बच्चे बोले हाँ माँ वो भी
पंचम सुर में गाती हो
सब मिलकर फिर बोले
इतनी एनर्जी कहाँ से लाती हो?

हमने कहा
जो तुम ही कर लेते कुछ थोडा सा पूजा-पाठ
कहाँ रह जाती मुझे ज़रुरत
हो जाते सबके ठाठ औ' बाठ

ए जी, जो तुम कुछ देर को
टी वी से ना बतियाते
बस बीवी से ही नयन मिलाते
तो बोलो हम क्यूँ भजन सुनाते?

और बच्चों तुम भी
छोड़ अपना मोबाइल,औ' कंप्यूटर
करते अपने कमरे की सफाई
तो फिर ना देते तुम मुझे
यूँ पंचम सुर की यही दुहाई

और सुनो तुम सब अब ये कि
जब चलती नहीं है मेरी मर्ज़ी
अपने आप ही आ जाती है मुझमे
यूँ भजन सुनाने की एनर्जी

देखो अब मेरी भी है उमर हुई
झाड़ू,पौंछे और बर्तन में
मेरी सारी ही उमर गयी
अब थोड़ी तुम सबसे मदद की है की मैंने गुहार
अब तुम इसे भजन समझो या समझो मेरी करुण पुकार
अब जब तक न मेरा हाथ बंटाओगे
पंचम सुर में तब तक यूँ ही
भजन हमेशा सुनते जाओगे....:)......

13 टिप्‍पणियां:

  1. चिंता न करें हर घर में होती है यह भजन. लेकिन अच्छा लगता है

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  2. बहुत बढ़िया सुनीता जी मज़ा आ गया...

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  3. आज पता चल ही गया इस दुनिया में मैं ही अकेली नहीं :)

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  4. :-) बहुत बढ़िया....
    लगा हमारी राम कहानी है :-)

    अनु

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  5. अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी ......

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  6. अब तुम इसे भजन समझो या समझो मेरी करुण पुकार
    अब जब तक न मेरा हाथ बंटाओगे
    पंचम सुर में तब तक यूँ ही
    भजन हमेशा सुनते जाओगे....:)...
    वाह बेहतरीन :)

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  7. वाह: बहुत बढ़िया सुनीता जी...सब की राम कहानी यही है..

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  8. यही तो तुम्हारी खासियत है सुनीता बात बात मे बात कह जाने की

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  9. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।
    मेरी नयी पोस्ट - "इंटरनेट के टॉप सर्च इंजन्स"
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  10. पसंद करने हेतु आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद....शुक्रिया रश्मिप्रभा दी....:-)

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