सोमवार, 13 अगस्त 2012

फोन





ना जाने कब से फोन हाथ में लेकर बैठी हूँ
कुछ खोयी सी....
कुछ सोचती सी.....
कब से सोच रही हूँ
तुम्हे फोन करूँ
कुछ खास नहीं
बस ऐसे ही
बस एक बार तुम्हारी आवाज़ सुन लूँ
एक बार मेरी कानों में गूंज उठे
तुम्हारी खरज आवाज़
रख लूँ
उसे प्यार से सिरहाने
जैसे कोई प्यारी धुन या गीत सुनते हुए सोने की आदत सी हो गई है मेरी....
फोन उठाकर नम्बर पर उंगलियों फिराया
फिर खुद ही काट दिया
ना जाने क्या सोच कर
फोन से ध्यान हटा लेती हूँ
कुछ करने का बहाना बना कर
कि फिर फोन उठा लेती हूँ
जैसे कि घंटी बजी हो,,,
शायाद तुमने फोन किया हो
नहीं, तुम्हे शायाद ज़रुरी नहीं लगता
रोज युहीं बेफजूल की बातें करना....
पर मुझे हर छोटी छोटी बातें तुम्हे बताना ना जाने क्यूँ अच्छा लगता है
कि जैसे आज वालकानी में कौवा बहुत बोल रहा था
कि बारिश हो तो रही थी पर रुक रुक कर
उमस जस की तस
जैसे कि तुमसे मिल के हमेशा घर आने के बाद लगता है मैंने तुम्हे ठीक से देखा ही नहीं
काश थोड़ी देर और रुक पाती तुम्हारे साथ
कभी नहीं भरा मेरा मन तुमसे मिलने के बाद
हर बार मिलने के बाद मिलने की थोड़ी इच्छा और बाकी बच ही जाती है.....
देखो ना, अभी भी जो कुछ लिख रही हूँ ध्यान फोन की तरफ़ ही है
शायाद फोन बजा ऐसा कानो को क्यों लग रहा है बार बार
फिर लगता है शायाद मैसेज किया हो कि "-आज समय नहीं मिला... बहुत बिज़ी था,,, ठीक हूँ,,,, मै सोने जा रहा हूँ, तुम भी सो जायो"
पर ऐसा भी कुछ नहीं आया ....
आज फिर रात आँखों में ही गुज़र जायेगी ...
पर कोई बात नहीं, तुम सो जाना ठीक से
मै तुम्हारे लिये गुन्गुनागी ...
बस तुम महसूस कर लेना
अच्छा, चलो जायो, अब सो जायो
फोन सिरहाने रख लिया है मैंने
नींद ना आये और मन करे तो फोन कर लेना......
मै जगती रहूंगी.....

असीमा भट्ट

6 टिप्‍पणियां:

  1. मोहब्बत ऐसी बेचैनियाँ लेकर ही आती है............

    आभार रश्मि दी.
    अनु

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  2. नींद ना आये और मन करे तो फोन कर लेना......
    मै जगती रहूंगी.....jise ham chahte hai uska intazaar har pal karte hain ..से कि तुमसे मिल के हमेशा घर आने के बाद लगता है मैंने तुम्हे ठीक से देखा ही नहीं
    काश थोड़ी देर और रुक पाती तुम्हारे साथ
    कभी नहीं भरा मेरा मन तुमसे मिलने के बाद
    हर बार मिलने के बाद मिलने की थोड़ी इच्छा और बाकी बच ही जाती है.....ise hi apnapan kahte hai ..jisake bina duniya berang ho jaati hai ..
    waah ..asima bhatt ji aapki kavita bahut pasand aayi

    SARAL ,SAHAJ ,..BHAVPURN ABHIVYKTI ..BADHAAII

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  3. वाह ! बहुत खूब .... !!
    एक पगली को दूसरी पगली का पता चला है .... !!

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  4. हर भाव ऐसा जैसे अभी जिया हो ... हर बात ऐसे जैसे अभी कही हो
    भावमय करती प्रस्‍तुति ... आभार आपका इस प्रस्‍तुति के लिए

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  5. bilkul maan ki baat kahi hai apne....aise bechani mehsoos hoti hai hamesha...jise apne bakubhi apne shabdo may bayan kiya hai

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  6. bhaut khub....apne jaise mere dil ke baat apne shabdo me kah di ho.....

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