सोमवार, 14 मई 2012

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !



ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !
कभी दर्द में बहते हैं
कभी यादो से उभरते हैं
कभी ख़ुशी से छलकते हैं
तो कभी गम में गीला करते हैं

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

दिल के बोझ को बूंदों में ढोते हैं
भावनाओ के गुबार को पानी से धोते हैं
फिर गीली पलकों से, गुलाबी गालो से
नाज़ुक हथेलियों से जाने कहा गायब हो जाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

कभी गैरो की ख़ुशी से छलक जाते हैं
कभी अपनों के गम में उभर आते हैं
लग जाये बस दिल को जब बात कोई
फिर कहाँ ये रोके जाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

ये शरीर रोते समय बस बुत बन जाते हैं
आँख, कान, जीभ सब मुर्दा हो जाते हैं
हैं भाषा जो इन आँसुओ की बस ,
आँसू ही बोल पाते हैं, आँसू ही सुन पाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

जो अकेले में बहे तो साथ देते हैं
अपनों में बहे तो सहारा बनते हैं
और गलती से गैरो में बहे
तो मजाक बना देते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

जिनकी आँखों में रहते हैं वो भावुक होते हैं,
कमज़ोर कहलाते हैं
और जिनकी आँखों से न बहे वो कठोर कहलाते हैं,
निर्दयी बन जाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

हर ना को हाँ में बदलने की ताक़त रखते हैं
पत्थर को भी पिघलाने का होसला रखते हैं
फिर भी ये सदियों से लाचारी, बेबसी
और मजबूरी की ही निशानी माने जाते हैं

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

जो औरत बहाए तो इसे उसकी आदत कहते हैं !
जो आदमी बहाए तो उसे औरत का दर्जा देते हैं !
न जाने ये दुनिया इन आसुओं में बस
कमजोर को ही क्यों पाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !



कोई आँसू बहाकर अपना काम बनाते हैं
तो कोई आँसू बहाकर हाल-ए-दिल सुनाते हैं
हैं मज़ा पर रोने का हे तब ही जब
शब्द गले से ना निकल पाते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

आँसू मगरमच्छ के भी होते हैं
आँसू खून के भी होते हैं
कहे चाहे कुछ भी ये दुनिया
हमें तो बस दिल के ही मालूम होते हैं

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

रोता आदमी क्यों अपने नसीब को कोसता हैं
जबकि कुछ हाथ उसके पलकें भी पोछते हैं
नाज़ुक मोतियों को अपने कंधे पर सहेजते हैं
खुशनसीब हे वो लोग जो किसी से लिपट कर बरसते हैं !

ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !

आँखों में लिए ये मोती हम दुनिया में आते हैं
और जाते वक़्त दुनिया की आँखों में दे जाते हैं
ये ज़िन्दगी हे कर्जा इन मोतियों का
जो मरकर ही चुका पाते हैं !



अंकित सोलंकी
संजोया हैं समय से चुराकर, कुछ पलों को पन्नो पर!

12 टिप्‍पणियां:

  1. आंसुओं का पूरा दर्शन पढ़ने को मिल गया...एक साथ.रश्मि प्रभा जी की आभारी हूँ.
    अंकित को बधाई एवं शुभकामनायें....!!

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  2. जिनकी आँखों में रहते हैं वो भावुक होते हैं,
    कमज़ोर कहलाते हैं
    हैं मज़ा पर रोने का हे तब ही जब
    शब्द गले से ना निकल पाते हैं !
    ये ज़िन्दगी हे कर्जा इन मोतियों का
    जो मरकर ही चुका पाते हैं !
    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति .... (हे की जगह है शायद होता)

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  3. क्या क्या रूप दिखाते आँसू...दिल से निकली आँसुओं की आवाज|
    आभार...अंकित जी को बधाई!!!

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  4. हैं भाषा जो इन आँसुओ की बस ,
    आँसू ही बोल पाते हैं, आँसू ही सुन पाते हैं !
    ऑंसुओं की पूरी व्याख्या हो गयी

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  5. ्पूरा आँसू पुराण लिख दिया…………सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. आपका चयन व प्रस्‍तुति दोनो ही उत्‍कृष्‍ट हैं .. बहुत - बहुत आभार सहित शुभकामनाएं
    कल 16/05/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ...'' मातृ भाषा हमें सबसे प्यारी होती है '' ...

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  7. रश्मिजी और सभी पाठको का धन्यवाद्...जिन्होंने इस रचना को सराहा और महसूस किया...

    बहुत ही अद्भुत ब्लॉग हे आपका...चुन-चुन कर कविताये प्रकाशित की हैं आपने...रश्मिजी...ढेरो बधाईया एवम साधुवाद

    आप सबकी टिप्पणिया इस आंसू वाली कविता पर पढकर मेरे चहरे पर तो मुस्कान आ गयी...बहुत-बहुत शुक्रिया...

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  8. ये आँसू भी कितने अजीब होते हैं !
    ye aansu hi to dil ke kareeb hote hai !
    bahut sundar .......pura jeevan darshan bhar diya !
    aabhar rashmi ji !

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  9. अश्रु गाथा ...भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  10. आंसुओ की इतनी सुन्दर और भावपूर्ण रचना..
    बहुत सुन्दर
    :-)

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  11. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति.......

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